रक्षा बंधन क्यों और कैसे मनाया जाता है 2021 | Raksha Bandhan Kyu Aur Kaise Manaya Jata Hai Hindi 2021 | रक्षा बंधन का इतिहास क्या है | रक्षा बंधन पर निबंध लिखे

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?

रक्षा बंधन 22 अगस्त 2021 को आने वाला है. ये सुनकर ही सभी बहनों के चेहरों में खुशी की झलक देखने को मिलती है. और होना भी चाहिए, ये भाई बहन का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. ये रिश्ता इतना ज्यादा पवित्र होता है की इसका सम्मान पूरी दुनिभर में किया जाता है ये मुख्य रूप से हमारे देश भारत का पवित्र त्योहार है लेकिन लगभग लगभग पूरी दुनिभर में मनाया जाता है.

मुझे लगता है की शायद ही कोई होगा जिसे की ये न पता हो की रक्षाबंधन का अर्थ क्या है और रक्षा बंधन को कैसे मनाया जाता है? फिर भी हमलोग चाहते है कि इस लेख में जितना हो सकता है उतना डिटेल्ज़ दे पाए।

भाई और बहन की रिश्ता पूरी तरह से अनोखा होती है. जहाँ पूरी दुनिभर में भाई बहन के रिश्ते को इतना सम्मान दिया वैसे भी भारत संस्कृतियों देश माना जाता है. इसलिए  तो इस रिश्ते को एक अलग ही पहचान/महत्व  दिया गया है. इसकी इतनी ज्यादा महत्व/पवित्र  है की इसे एक त्योहार/फ़ेस्टिवल  के रूप में मनाया जाता है. दोस्तों मैं  रक्षा बंधन इन हिंदी की ही बात कर रहा हूँ. 

इस त्यौहार में भाई बहन के प्यार को एक परंपरा - विश्वाश और त्रधा  के रूप में मनाया जाता है. रक्षा बंधन एक अनोखी हिंदू त्यौहार है जिसे की केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुसरे देशों में भी भाई बहन के प्यार का प्रतिक मानकर खूब हर्षउल्लाश से मनाया जाता है. 

इस पर्व रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) को श्रावण माह के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. जो की अक्स अगस्त (August) के महीने में आता है और इस साल 22 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा.

सम्बंधित लेख।

रक्षा बंधन क्या है ? - What is Raksha Bandhan in Hindi ?

रक्षा बंधन का पर्व दो शब्दों  से मिलकर  बना हुआ है, “रक्षा” और “बंधन”. संस्कृत भाषा के अनुसार, रक्षा बंधन का मतलब होता है की “एक ऐसा बंधन जो रक्षा प्रदान करता हो” रक्षा बंधन कहते है. यहाँ पर “रक्षा” का मतलब रक्षा/सुरक्षा  प्रदान करना होता है और “बंधन” का मतलब होता है एक गांठ जो रक्षा का होता है. और बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांध कर अपने भाई से रक्षा करने के लिए वचन/वादा/प्रोमिस   लेती है।

ये दोनों शब्द ही  मिलकर एक भाई-बहन के प्यार एंड रिस्पेक्ट का  प्रतिक होते हैं. यहाँ ये प्रतिक केवल खून के रिश्ते का  नहीं होता है बल्कि ये एक पवित्र रिश्ते (मुँह बोले भाई) को जोड़ता  है. यह त्यौहार खुशी प्रदान करने वाला होता है वहीँ ये भाइयों को ये याद दिलाता है की उन्हें अपने बहनों की हमेशा रक्षा करनी है.संस्कृत भाषा के अनुसार, इस पर्व का मतलब होता है की “एक ऐसा बंधन / एक ऐसा डोर  जो की रक्षा प्रदान करता हो।

क्या पत्नी, पति को रखी बांध सकती है? | kya patni, pati ko rakhi bandh sakti hai ?

अगर इसका सिम्पल और एक सब्द में उतर देना हो तो अप हाँ बोल सकते है अगर इसका व्याख्या करना है तो आप नीचे दिए गये पॉंट्स पर धायन दीजिए।

रक्षाबंधन  शब्द रक्षा + बंधन  (raksha + bandhan) से मिलकर बना है।

रक्षा किसे कहते है?

रक्षा का अर्थ होता है, विकट/बुरा  परिस्थिति में आपके लिए  सदैव तत्पर रहना, तैयार रहना, रक्षा कहलाता है। रक्षा करने वाला अपने प्राणो से भी ज़्यादा अपने रक्षा के वचन को अपना धंर्म मानते हुए निभाते है।

बंधन किसे कहते है ?

बंधन एक प्रकार का संकल्प है, जिसे प्रतिज्ञा की भांति माना जाता है।

रक्षाबंधन के परिभाषा के अनुशार, राखी उसे बाँध सकते है जिससे हमें रक्षा मिल सकता है ओ रिस्ता पर निर्भर नहि करता। हमसभि इस त्योहार को मूल्य रूप से भाई – बहन का त्योहार के रूप में मानते है लेकिन इसको वस्तवकी मायने में समझा तो जिससे हमें रक्षा मिल सकता है उसे रखी बांध सकते है।

रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और लंबी उम्र की दुआ मांगती है। लेकिन जिनके लिए बहन से राखी बंधवाना मुश्किल हो वह पत्नी से राखी बंधवा सकते हैं। ऐसा करना धर्म संगत भी है क्योंकि राखी भाई-बहनों के साथ ही पति-पत्नी के प्रेम का भी त्योहार है। भविष्य पुराण में इस संदर्भ में एक एक कथा का उल्लेख किया गया है।

कथा के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवताओं की सेना दानवों से पराजित होने लगी। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की लगातार हो रही हार से घबरा गयी और इंद्र के प्राणों रक्षा के उपाय सोचने लगी। काफी सोच-विचार करने के बाद शचि ने तप करना शुरू किया। इससे एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ।

शचि ने इस रक्षासूत्र को इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर विजय पाने में सफल हुए। श्रावण पूर्णिमा के दिन शचि ने इंद्र को रक्षासूत्र बांधा था। इसलिए इस दिन से रक्षा बंधन का त्योहार बनाया जाने लगा।

भविष्य पुराण के अनुसार यह जरूरी नहीं कि भाई-बहन अथवा पति-पति रक्षा बंधन मिलकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाएं। आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं।

रक्षा बंधन का इतिहास - History of Raksha Bandhan in Hindi 

राखी का त्यौहार पुरे भारतवर्ष में काफी हर्ष एवं उल्लाश के साथ मनाया जाता है. यह एक ऐसा त्यौहार है जिसमें सभी वर्ग के लोग इसे मनाते हैं. लेकिन सभी त्योहारों के तरह ही राखी त्यौहार मनाने का भी इतिहास हैं. चलिए ऐसे ही कुछ रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में जानते हैं.

पहले तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधी जाती थी.

सदियों से चली आ रही रीति के मुताबिक, बहन भाई को राखी बांधने से पहले प्रकृति की सुरक्षा के लिए तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधती है जिसे वृक्ष-रक्षाबंधन भी कहा जाता है। हालांकि आजकल इसका प्रचलन नही है। राखी सिर्फ बहन अपने भाई को ही नहीं बल्कि वो किसी खास दोस्त को भी राखी बांधती है जिसे वो अपना भाई जैसा समझती है और तो और रक्षाबंधन के दिन पत्नी अपने पति को और शिष्य अपने गुरु को भी राखी बांधते है।

Raksha Bandhan 2021: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ और लंबे जीवन की कामना करती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन 22 अगस्त को मनाया जाएगा।

जिसके लिए बहने अभी से तैयारियों में जुट गयी हैं। वास्तव में रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम को समर्पित त्योहार है जो सदियों से मनाया जाता आ रहा है। आइये जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी कुछ धार्मिक और ऐतिहासिक कहानियों के बारे में।

सम्राट Alexander और सम्राट पुरु

राखी त्यौहार के सबसे पुरानी कहानी सन 300 BC में हुई थी. उस समय जब Alexander ने भारत जितने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ यहाँ आया था. उस समय भारत में सम्राट पुरु का काफी बोलबाला था. जहाँ Alexander ने कभी किसी से भी नहीं हारा था उन्हें सम्राट पुरु के सेना से लढने में काफी दिक्कत हुई. 

जब Alexander की पत्नी को रक्षा बंधन के बारे में पता चला तब उन्होंने सम्राट पुरु के लिए एक राखी भेजी थी जिससे की वो Alexander को जान से न मार दें. वहीँ पुरु ने भी अपनी बहन का कहना माना और Alexander पर हमला नहीं किया था.

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की कहानी का कुछ अलग ही महत्व है. ये उस समय की बात है जब राजपूतों को मुस्लमान राजाओं से युद्ध करना पड़ रहा था अपनी राज्य को बचाने के लिए. राखी उस समय भी प्रचलित थी जिसमें भाई अपने बहनों की रक्षा करता है. उस समय चितोर की रानी कर्णावती हुआ करती थी. वो एक विधवा रानी थी.

और ऐसे में गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने उनपर हमला कर दिया. ऐसे में रानी अपने राज्य को बचा सकने में असमर्थ होने लगी. इसपर उन्होंने एक राखी सम्राट हुमायूँ को भेजा उनकी रक्षा करने के लिए. और हुमायूँ ने भी अपनी बहन की रक्षा के हेतु अपनी एक सेना की टुकड़ी चित्तोर भेज दिया. जिससे बाद में बहादुर साह के सेना को पीछे हटना पड़ा था. 

इन्द्रदेव की कहानी

भविस्य पुराण में ये लिखा हुआ है की जब असुरों के राजा बाली ने देवताओं के ऊपर आक्रमण किया था तब देवताओं के राजा इंद्र को काफी छती पहुंची थी.

इस अवस्था को देखकर इंद्र की पत्नी सची से रहा नहीं गया और वो विष्णु जी के करीब गयी इसका समाधान प्राप्त करने के लिए. तब प्रभु विष्णु ने एक धागा सची को प्रदान किया और कहा की वो इस धागे को जाकर अपने पति के कलाई पर बांध दें. और जब उन्होंने ऐसा किया तब इंद्र के हाथों राजा बलि की पराजय हुई.

इसलिए पुराने समय में युद्ध में जाने से पूर्व राजा और उनके सैनिकों के हाथों में उनकी पत्नी और बहनें राखी बांधा करती थी जिससे वो सकुशल घर जीत कर लौट सकें.

भविष्‍य पुराण की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धरती की रक्षा के लिए देवता और असुरों में 12 साल तक युद्ध चला लेकिन देवताओं को विजय नहीं मिली। तब देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र की पत्नी शची को श्राणण शुक्ल की पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर रक्षासूत्र बनाने के लिए कहा। इंद्रणी ने वह रक्षा सूत्र इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा और फिर देवताओं ने असुरों को पराजित कर विजय हासिल की।

वामन अवतार कथा

एक बार भगवान विष्णु असुरों के राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने बलि से वरदान मांगने के लिए कहा। तब बलि ने उनसे पाताल लोक में बसने का वरदान मांगा। भगवान विष्णु के पाताल लोक चले जाने से माता लक्ष्मी और सभी देवता बहुत चिंतित हुए। तब मां ने लक्ष्मी गरीब स्त्री के वेश में पाताल लोक जाकर बलि को राखी बांधा और भगवान विष्णु को वहां से वापस ले जाने का वचन मांगा। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। तभी से रक्षाबंधन मनया जाता है।

Raksha Bandhan के मुख्य बातें रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता हैवास्तव में रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम को समर्पित त्योहार है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा बंधन मनाने के पीछे कई कहानियां छिपी हैं 

द्रौपदी और श्रीकृष्‍ण की कथा

महाभारत काल में कृष्ण और द्रोपदी को भाई बहन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण की तर्जनी उंगली कट गयी थी। तब द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांधा था। उस दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था। तभी से रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। कृष्ण ने एक भाई का फर्ज निभाते हुए चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी।

बादशाह हुमायूं और कमर्वती की कथा

रक्षाबंधन पर हुमायूं और रानी कर्मवती की कथा सबसे अधिक याद की जाती है। कहा जाता है कि राणा सांगा की विधवा पत्नी कर्मवती ने हुमांयू को राखी भेजकर चित्तौड़ की रक्षा करने का वचन मांगा था। हुमांयू ने भाई का धर्म निभाते हुए चित्तौड़ पर कभी आक्रमण नहीं किया और चित्तौड़ की रक्षा के लिए उसने बहादुरशाह से भी युद्ध किया

सिकंदर और पुरू की कथा

इतिहास के अनुसार राजा पोरस को सिकंदर की पत्नी ने राखी बांधकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगा था। जिसके चलते सिकंदर और पोरस ने रक्षासूत्र की अदला बदली की थी। एक बार युद्ध के दौरान सिकंदर ने पोरस पर हमला किया तो वह रक्षासूत्र देखकर उसे अपना दिया हुआ वचन याद आ गया और उसने पोरस से युद्ध नहीं किया।

1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोर: भारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता जमाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविंद्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया. वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा हिन्दू और मुस्लिमों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही. इस समय बंगाल में और हिन्दू मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया. 

सिखों का इतिहास: 18 वीं शताब्दी के दौरान सिख खालसा आर्मी के अरविन्द सिंह ने राखी नामक एक प्रथा का अविर्भाव किया, जिसके अनुसार सिख किसान अपनी उपज का छोटा सा हिस्सा मुस्लिम आर्मी को देते थे और इसके एवज में मुस्लिम आर्मी उन पर आक्रमण नहीं करते थे. 

महाराजा रणजीत सिंह, जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की, की पत्नी महारानी जिन्दान ने नेपाल के राजा को एक बार राखी भेजी थी. नेपाल के राजा ने हालाँकि उनकी राखी स्वीकार ली किन्तु, नेपाल के हिन्दू राज्य को देने से इनकार कर दिया.

कृष्ण और द्रौपधी की कहानी

लोगों की रक्षा करने के लिए Lord Krishna को दुष्ट राजा शिशुपाल को मारना पड़ा. इस युद्ध के दौरान कृष्ण जी की अंगूठी में गहरी चोट आई थी. जिसे देखकर द्रौपधी ने अपने वस्त्र का उपयोग कर उनकी खून बहने को रोक दिया था.

भगवान कृष्ण को द्रौपधी की इस कार्य से काफी प्रसन्नता हुई और उन्होंने उनके साथ एक भाई बहन का रिश्ता निभाया. वहीं उन्होंने उनसे ये भी वादा किया की समय आने पर वो उनका जरुर से मदद करेंगे.

बहुत वर्षों बाद जब द्रौपधी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के राजकुमार दुहसासन ने द्रौपधी का चिर हरण करने लगा. इसपर कृष्ण ने द्रौपधी की रक्षा करी थी और उनकी लाज बचायी थी.

महाभारत में राखी

भगवान कृष्ण ने युधिस्तिर को ये सलाह दी की महाभारत के लढाई में खुदको और अपने सेना को बचाने के लिए उन्हें राखी का जरुर से उपयोग करना चाहिए युद्ध में जाने से पहले. इसपर माता कुंती ने अपने नाती के हाथों में राखी बांधी थी वहीँ द्रौपधी ने कृष्ण के हाथो पर राखी बांधा था. 

संतोधी माँ की कहानी

भगवान गणेश के दोनों पुत्र सुभ और लाभ इस बात को लेकर परेशान थे की उनकी कोई बहन नहीं है. इसलिए उन्होंने अपने पिता को एक बहन लाने के लिए जिद की. इसपर नारद जी के हस्तक्ष्येप करने पर बाध्य होकर भगवान् गणेश को संतोषी माता को उत्पन्न करना पड़ा अपने शक्ति का उपयोग कर. 

वहीँ ये मौका रक्षा बंधन ही था जब दोनों भाईओं को उनकी बहन प्राप्त हुई.

यम और यमुना की कहानी

एक लोककथा के अनुसार मृत्यु के देवता यम ने करीब 12 वर्षों तक अपने बहन यमुना के पास नहीं गए, इसपर यमुना को काफी दुःख पहुंची. 

बाद में गंगा माता के परामर्श पर यम जी ने अपने बहन के पास जाने का निश्चय किया. अपने भाई के आने से यमुना को काफी खुशी प्राप्त हुई और उन्होंने यम भाई का काफी ख्याल रखा.

इसपर यम काफी प्रसन्न हो गए और कहा की यमुना तुम्हे क्या चाहिए. जिसपर उन्होंने कहा की मुझे आपसे बार बार मिलना है. जिसपर यम ने उनकी इच्छा को पूर्ण भी कर दिया. इससे यमुना हमेशा के लिए अमर हो गयी.

क्या भारत के दुसरे धर्मों में रक्षा बंधन मनाया जाता है?

बिलकुल मनाया जाता है। चलिए अब जानते हैं की कैसे भारत के दुसरे धर्मों में रक्षा बंधन मनाया जाता है. 

1. हिंदू धर्म में – यह त्यौहार हिंदू धर्म में काफी हर्ष एवं उल्लाश के साथ मनाया जाता है. वहीँ इसे भरत के उत्तरी प्रान्त और पश्चिमी प्रान्तों में ज्यादा मनाया जाता है. इसके अलावा भी दुसरे देशों में भी इसे मनाया जाता है जैसे की नेपाल, पाकिस्तान, मॉरिशस में भी मनाया जाता है.

2. Jain धर्म में – जैन धर्म में उनके जैन पंडित भक्तों को पवित्र धागा प्रदान करते हैं.

3. Sikh धर्म में – सिख धर्म में भी इसे भाई और बहन के बीच मनाया जाता है. वहीँ इसे राखाडी या राखरी कहा जाता है.

4. Muslim धर्म में – दोस्तों, मुस्लिम लोग भी अब  बहुत ही धूम धाम से इस त्यौहार को मानते है. 

भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षा बंधन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है. इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बंधन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं.

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है?

1. राखी का त्योहार इस बार 22 अगस्त, इस दिन रविवार पड़ रहा है.

 2. रक्षा बंधन तिथि: - 22 अगस्त 2021, रविवार 

3. पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: - 21 अगस्त 2021, शाम 03:45 मिनट

 4. पूर्णिमा तिथि समापन: - 22 अगस्त 2021, शाम 05:58 मिनट

 5. शुभ मुहूर्त: - सुबह 05:50 मिनट से शाम 06:03 मिनट

 6. रक्षा बंधन की समयावधि: - 12 घंटे 11 मिनट 

7. रक्षा बंधन के लिए दोपहर में समय: - 01:44 से 04:23 मिनट तक 

8. अभिजीत मुहूर्त: - दोपहर 12:04 से 12:58 मिनट तक

 9. अमृत काल: - सुबह 09:34 से 11:07 तक

 10. ब्रह्म मुहूर्त: - 04:33 से 05:21 तक

 11. भद्रा काल: - 23 अगस्त, 2021 सुबह 05:34 से 06:12 तक

 यदि हम सुभ मुहूर्त की बात करें तब इस साल रक्षा बंधन पर राखी बांधने मुहूर्त लगभग 2 घंटे 39 मिनट है. रक्षा बंधन 2021 के दिन बहने अपने भाई को दोपहर 01:44 से शाम के 04:23 बजे तक राखी बांध सकती हैं. लेकिन रक्षा बंधन की समयावधि: - 12 घंटे 11 मिनट है जो सुबह 05:50 मिनट से शाम 06:03 मिनट तक है.

2021 में रक्षाबंधन कब है?

इस वर्ष 2021 में रक्षाबंधन है 22 अगस्त 2021, रविवार को.

रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है?

सभी त्योहारों के तरह ही रक्षा बंधन को मनाने की एक विधि होती है जिसका पालन करना बहुत ही आवश्यक होता है.

चलिए इस विषय में विस्तार में जानते हैं. रक्षाबंधन के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लेना होता है. इससे मन और शरीर दोनों ही पवित्र हो जाता है. फिर सबसे पहले भगवान की पूजा की जाती है. पुरे घर को साफ कर चरों तरफ गंगा जल का छिडकाव किया जाता है.

अब बात आती है राखी बांधने की. इसमें पहले राखी की थाली को सजाया जाता है. रक्षाबधंन के प्रवित्र त्याहार के दिन पितल की थाली मे ऱाखी ,चंदन ,दीपक ,कुमकुम, हल्दी,चावल के दाने नारियेल ओर मिठाई रखी जाती है. 

अब भाई को बुलाया जाता है और उन्हें एक साफ़ स्थान में नीचे बिठाया जाता है. फिर शुरू होता है राखी बांधने की विधि. सबसे पहले थाली में दीये को जलाती है, फिर बहन भाई के माथे पर तिलक चन्दन लगाती है. वहीँ फिर भाई की आरती करती है.

उसके बाद वो अक्षत फेंकती हुई मन्त्रों का उच्चारण करती है. और फिर भाई के कलाई में राखी बांधती है. वहीँ फिर उसे मिठाई भी खिलाती है. यदि भाई बड़ा हुआ तब बहन उसके चरण स्पर्श करती है वहीँ छोटा हुआ तब भाई करता है.

अब भाई अपने बहन को भेंट प्रदान करता है. जिसे की बहन खुशी खुशी लेती है. एक बात की जब तक राखी की विधि पूरी न हो जाये तब तक दोनों को भूका ही रहना पड़ता है. इसके पश्चात राखी का रस्म पूरा होता है.

रक्षा बंधन का महत्व

रक्षाबंधन का महत्व सच में सबसे अलग होता है. ऐसा भाई बहन का प्यार शायद ही आपको कहीं और देखने को मिले किसी दुसरे त्यौहार में. ये परंपरा भारत में काफी प्रचलित है और इसे श्रावन पूर्णिमा के लिए मनाया जाता है.

यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें की बहन भाई के हाथों में राखी बांधकर उससे अपने रक्षा की कसम लेती है. वहीँ भाई का भी ये कर्तव्य होता है की वो किसी भी परिस्थिति में अपने बहन की रक्षा करे. सच में ऐसा पवित्र पर्व आपको दुनिया में कहीं और देखने को न मिले.

राखी का त्यौहार श्रावन के महीने में पड़ता है, इस महीने में गर्मी के बाद बारिस हो रही होती है, समुद्र भी शांत होता है और पुर वातावरण भी काफी मनमोहक होता है.

ये महिना सभी किशानों, मछवारे और सामुद्रिक यात्रा करने वाले व्यवसायों के लिए भी काफी महत्व रखता है. रक्षाबंधन को नारियली पूर्णिमा भी कहा जाता है भारत के सामुद्रिक तट इलाकों में. इस दिन वर्षा के देवता इंद्र और सुमद्र के देवता वरुण की पूजा की जाती है. वहीँ देवताओं को नारियल अर्पण किये जाते हैं और खुशहाली की कामना की जाती है.

इसमें नारियल को समुद्र में फेंका जाता है या कोई दुसरे पानी के जगह में. लोगों का मानना है की प्रभु श्रीराम भी माता सीता को छुड़ाने के लिए इसी दिन अपनी यात्रा प्रारंभ की थी. उन्होंने समुद्र को पत्थरों से निर्मित पुल के माध्यम से पार किया था जिसे की वानर सेना ने बनाया था. नारियल के उपरी भाग में जो तीन छोटे छोटे गड्ढे होते हैं उसे प्रभु शिवजी का माना जाता है.

मछवारे भी अपने मछली पकड़ने की शुरुवात इसी दिन से करते हैं क्यूंकि इस समय समुद्र शांत होता है और उन्हें पानी में जाने में कोई खतरा नहीं होता है.

किशानों के लिए ये दिन कजरी पूर्णिमा होता है. किशान इसी दिन से ही अपने खेतों में गेहूं की बिज बोते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं भगवान से. 

ये दिन ब्राह्मणों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होता है. क्यूंकि इस दिन वो अपने जनेयु को बदलते हैं मन्त्रों के उचार्रण के साथ. वहीँ वो इस पूर्णिमा को ऋषि तर्पण भी कहते हैं. वहीँ विधि के ख़त्म हो जाने के बाद ये आपस में नारियल से निर्मित मिठाई खाते हैं.

रक्षाबंधन की तरह दूसरा कौन सा त्यौहार जो की भाई बहन के प्यार को दर्शाता है?

रक्षाबंधन के तरह ही एक दूसरा त्यौहार भी है जो की भाई बहन के प्यार को दर्शाता है. इसे त्यौहार का नाम है भाईदूज. इस त्यौहार में भाई बहन के रिश्ते को मजबूती प्रदान करने के लिए मनाया जाता है.

इसमें बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और उनके अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना करती हैं. वहीँ भाई भी सदा अपने बहन के साथ खड़ा होने के प्रतिज्ञा करते हैं. वहीँ दोनों एक दुसरे को मिठाई खिलाते हैं और भाई अपने बहन को तौफे देता है.

लोग अपने पारंपरिक पोषाक धारण करते हैं जिससे की पर्व की गरिमा बनी रहे. वहीँ ये केवल भाई बहन के आपसी मेल मिलाप का ही समय नहीं होता बल्कि पूरा परिवार एक दुसरे के साथ अच्छा समय व्यतीत करता है.

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने