Sikmi khata kya hota hai ? सिकमी खाता क्या होता है? सिकमी जमीन किसे कहते हैं ? शिकमी रैयत ?

Sikmi khata kya hota hai ? सिकमी खाता क्या होता है? सिकमी जमीन किसे कहते हैं ? शिकमी रैयत ?

 आज के 50-100 साल पहले, जमिंदरो के पास बहुत सारे ज़मीन हुआ करता था जैसे कि कोई कोई ज़मींदार के पास 100, 500, 1000 यहाँ तक की 5000 एकड़ तक ज़मीन हुआ करता था। इतने अधिक भू-भाग होने के कारण इसमें खेती करना जमिंदरो के लिए मुसकिल होता था। तो जमिंदरो ने अपने जमीन का कुछ-कुछ हिस्सा 10-20 एकड़ करके छोटे किसनो को खेती करने कि लिए दे दिए। कुछ साल बाद सरकार ने भू-बिभग का सर्वे कराया और उस सर्वे में जो किसान ज़मींदार के खेतों में कम कर रहे थे। उस ज़मीन कि लिए रिपोर्ट तैयार किया गया और उन सभी किसानो कि लिए जो उसपर एक खाता खोला गया जिसको सिकमी खाता बोलते हैं।

 सिकमी खाता का अर्थ यह है कि ज़मींदार रैयत को किसी भी सर्त पर उसे ज़मीन से निकाल नहि सकते बदले में रैयत यानी सिकमी खाता धारी उनको मालगुज़ारी के रूप में सरकार द्वारा निर्धारित धन देंगे।


सम्बंधित लेख, 

 सिकमी खाता 2 प्रकार कि होता है 

 • खेती करने वाला ज़मीन जो छोटे किसनो को मिला सिकमी कि रूप में

 • जमिंदारो द्वारा बसने के लिए दिया गया भूमि 

खेती करने वाला ज़मीन में सिकमी खाता धारी मालगुज़ारी के रूप में कुछ धन ज़मींदार को देते हैं। जबकि जिस ज़मीन में मकान होता है उसमें मकान मय सहन लिखा होता है मतलब रैयत का मकान होता है और उसे ज़मींदार चाह कर भी नहि हटा सकता हैं। बदले में सिकमी खाता धारी ज़मींदार को उचित मालगुज़ारी देंगे।

 हमारे पर्सनल अनुभव और एक घटना इसमे दर्शन चाहूँगा – पुराना खाता खाता नम्बर 56 प्लॉट नम्बर 286 रक़बा 150 डिस्मिल इसका नया खाता नम्बर 73 नया प्लॉट नम्बर 331 रक़बा 31 डिस्मिल, प्लॉट नम्बर 332 रक़बा 32 डिस्मिल, प्लॉट नम्बर 334 रक़बा 6 डिस्मिल, प्लॉट नम्बर 333 रक़बा 32 डिस्मिल, प्लॉट नम्बर 335 रक़बा 20 डिस्मिल, प्लॉट नम्बर 336 रक़बा 25 डिस्मिल. 

 एक स्टोरी है आज के लगभग 50-60 साल पहले 1965-70 में, हमारे गाव में एक साह जी रहते थे जिनका नाम सीता साह था उनके भाई और पापा ने अपने जायजात निकाल दिए थे तो उनके पास रहने के लिए जगह नहि था फिर सीता साह मेरे बाबा जी से बोले की मुझे कुछ जगह दे दीजिया बदले में एक साल में 2 रुपए ओर आपके खेत पर जो कुछ फसल होगा उसे लाने में सहयोग करूँगा। तो हमारे बाबा जी ने उन्हें – पुराना खाता नम्बर 56 प्लॉट नम्बर 286 जो की टोटल रक़बा 150 डिस्मिल था इसमें से 6 डिस्मिल उनको दे दिए।

 कुछ दिन बाद लगभग 10-15 साल बाद, सीता साह धीरे धीरे 6 डिस्मिल और ज़मीन क़ब्ज़ा कर लिऐ और जो सर्त रखें थे की एक साल में 2 रुपए और आपके खेत पर जो कुछ फसल होगा उसे लाने में सहयोग करूँगा उसे भी बंद कर दिए। फिर कुछ दिनो बाद लगभग 1978-79 में सरकार द्वारा सर्वे हुआ सर्वेकारो ने हमारे बाबा लोगों को मालिक बनाते हुए सीता साह को सिकमी दख़लकार बना दिए जिसका सिकमी खाता नम्बर 8 और प्लॉट नम्बर 334 रक़बा 6 डिस्मिल हैं। जो हमारे खतियानी ज़मीन है जिसका नया खाता नम्बर 73 नया प्लॉट नम्बर 334 रक़बा 6 डिस्मिल। ये चीज़ किसी को मालूम नहि था न तो साह जी को न ही हमारे बाबा जी क़ो। 

 कुछ दिन बाद लगभग 1985 में सीता साह पंचायत जमा किए और उसमें रिक्वेस्ट किए की हमारे 2 बेटे है सोभनाथ साह और रामनाथ साह उनके लिए घर बनवाना है और इस ज़मीन कि कोई भी काग़ज़ात हमारे पास नहि हैं। तो इसका रगिस्टरी कराया जाए तो पंचो ने ये तय किया की इस ज़मीन जो सीता साह कि क़ब्ज़े में है उसका नापी कराकर उनको रगिस्टरी किया जाए बदले में सीता साह ज़मीन मालिकों (मुंन्द्रिक मेहता, जय गोविंद मेहता, चंद्रिका मेहता पिता राम मानिक मेहता ) को सलामी के रूप में 1200 रुपया देंगे।

 जब ज़मीन को नापा गया जो 12 डिस्मिल निकला, सीता साह ने कुछ पंचो जैसे की नथुनी राम और खेलवान मेहता को कुछ पैसे खिलाकर उसे 17 डिस्मिल करा लिए और ज़मीन रगिस्टरी हो गया जिसका – पुराना खाता खाता नम्बर 56 प्लॉट नम्बर 286 रक़बा 150 डिस्मिल जिसमें से 17 डिस्मिल का केवाला सीता साह कर लिए जिसका चौहदी निम्न प्रकार हैं। 

उतर – निज 

पछ्चिम - निज 

द्क्छिन - राम परिखा चमार / राम फल चमार 

पूर्व - रास्ता 

 एक साल बाद 1986 में सीता साह अमीन बूलाकर 17 डिस्मिल ज़मीन नपवाकर ले लिए। मतलब 5 डिस्मिल अतिरिक्त ज़मीन ले लिए धोखा देकर। 

 फिर से जनवरी 2021 में सिकमी दख़ल का काग़ज़ दिखाकर उनके बेटे नाती 6 डिस्मिल और ज़मीन का माँग कर रहे है।  जब हमारे पूर्वजों ने उस चौहदी पर का ज़मीन पुराना खाता नम्बर 56 पुराना प्लॉट नम्बर 286 से रगिस्टरी कर दिए है तो फिर से कहा से दिया जाए।जिसका नया खाता नम्बर 73 नया प्लॉट नम्बर 334 रक़बा 6 डिस्मिल है जो नया खाता प्लॉट में उसे सिकमी दकल दिया हुआ है और उसी चौहदी पर मौजूद है यानी सिकमी दख़ल वाले ही ज़मीन रगिस्टरी हुआ है और नया प्लॉट 334, पुराने प्लॉट 286 से ही बना हुआ है। और सिकमी दख़लकार को ही रगिस्टरी हुआ है पुराना खाता नम्बर 56 पुराना प्लॉट नम्बर 286 से।

इसको एक और उदाहरण से समझते है, हमलोगो के पुराना प्लॉट 286 जो 150 डिस्मिल का था उसमें से 17 डिस्मिल रगिस्टरी हुआ है, तो सिम्पल सी बात है की चौहदी दिया जाएगा, और सभी ज़मीन रगिस्टरी के समय दिया भी जाता है, तो इसमें भी दिया गया है। 

लेकिन अभी लड़ाई के मेन मुद्दा है की उसने (सीता साह के नाती,बेटे) नये प्लॉट में ग़लत चौहदी पर ज़मीन ऑनलाइन करा लिए है और सिकमी वाले प्लॉट को छोड़ दिए है और बोल रहे है की मुझे सिकमी सरकार ने दिया है और उसको छोड़कर मुझे अलग से 17 डिस्मिल ज़मीन चाहिए।

दोस्तों, ज़मीन विभाग में कब सुधार होगा, कितना लूटेंगे ये CI और कर्मचारी लोग, बताई ग़लत चौहदी पर ज़मीन ऑनलाइन कैसे कर दिए, अगर चौहदी की वैल्यू नहि होती है तो क्यों केवाला में दिया जाता है, और बिना स्पॉट विज़िट किए, की कौन सी ज़मीन केवाला धारी के क़ब्ज़े में है कैसे ऑनलाइन कर दिए, जो ज़मीन उसके दख़ल में है उसके अनुशार ऑनलाइन होना चाहिए ताकि लड़ाई न पैदा हो। इस मामले में लडाई होने के मेन जीमेवार CI, कर्मचारी है। क्योंकि आम जनता उतना समझदार नहि होता की ग़लत सही में फ़र्क़ कर पाए।

 मेरा 2 प्रसन है

1. सीता साह के पुत्र सोभनाथ साह 6 डिस्मिल ज़मीन और माँग रहे हैं। मतलब टोटल 23 डिस्मिल ज़मीन की डिमांड कर रहे है अगर मेरा पुराना प्लॉट 17 डिस्मिल का ही होता तो ये क्या करते और किस हिसाब से माँगते। और क्या स्तिथि होता। 

2. अगर हमारे पूर्वजों ने पुराना खाता नम्बर 56 पुराना प्लॉट नम्बर 286 के सारे ज़मीन रगिस्टरी कर देते यानी पूरे 150 डिस्मिल, तो फिर हमलोग 6 डिस्मिल और ज़मीन कहा से देते या फिर क्या होता है। 

अभी तक हमलोग ज़मीन नहि दिए हैं और उनका हक़ भी नहि  बनता है क्योंकि वही ज़मीन रगिस्टरी हुआ है जो सिकमी दकल में है नया खाता प्लॉट में सिकमी दिया हुआ है और रगिस्टरी पुराने खाता प्लॉट से किया गया है और नया खाता प्लॉट उसी पुराने खाता प्लॉट से बना हुआ है और ओ भी उन्ही को रगिस्टरी हुआ है जो सिकमी दख़लकार है ज़मीन उनके क़ब्ज़े में बहुत पहले से ही हैं। लेकिन ये कुछ लोगों जो नीच मानसिकता के होते है उसे समझना बहुत ही मुसकिल हैं। हमारे पूर्वजों ने उन्हें बसाया और आज ओ हमें उजाड़ने के लिए नया नया तरीक़ा निकाल रहे है जितना का केवाला है उतना ज़मीन तो हमलोग दे ही  दिए है 1986 में ही लेकिन उनको और चाहिए, अभी इस केस में हमलोग उस प्लॉट में घर , कुआँ ये सभ करा लिए है क्योंकि ये ज़मीन रगिस्टरी हुए बहुत दिन हो गये थे और वास्तविक में उनका बिलकुल भी राइट्स नहि बनता अगर आप सभी में कोई है जो उन्हें या इस मैटर को सुलझा से तो बहुत मेहरबानी होंगी।

क्या सिकमी खाता रद्द हो सकता है?

अगर, हम सिम्पल भाषा में सिकमी कि मतलब जाने तो ये होता है कि सिकमी दख़लकर को उस ज़मीन से हटा नहि सकते। लेकीन कुछ सर्तो पर सिकमी खाता रद्द हो सकता है.

जैसे की जिसके नाम  से सिकमी खाता है अगर ओ गुजर गये है और ज़मीनदार भी गुजर गये हो और उसके साथ अगर सिकमीधारी और ज़मीन मालिक दोनो के बीच रिस्ता ख़राब हो गया हो, उस स्थिती में सिकमी खाता रद्द हो सकता है।

या फिर सिकमीधारी बहुत दिनो से उस ज़मीन पर अपना क़ब्ज़ा छोड़ चुका और खेती भी नहि कर रहा है उस स्थिती में सिकमी खाता रद्द हो सकता है।

सिकमी खाता होने के मतलब ये होता है ज़मींदार सिकमीधारी को किसी भी स्थिती उस ज़मीन से निकाल नहि सकता, लेकिन ओ ज़मीन ज़मींदार के ही होते है।

अतः अगर आप सिकमीधारी है तो आप उस ज़मीन को कुछ मुआवज़ा देक़र ज़मींदार से केवाल करा ले और उसका पूर्ण स्वामित्व प्राप्त कर ले।

 नहीं हो सकती सिकमी नेचर की जमीन की खरीद बिक्री

झारखंड में सिकमी दूसरे जमीन रैयत द्वारा मालगुजारी के तहत प्रदान की जाती है. इस जमीन पर मालगुजारी प्राप्त व्यक्ति यानी तो सिकमी धारी है ओ  पूरे जीवन इसका उपयोग मालगुजारी के रूप में  कर सकता है. लेकिन  इस प्रकार / नेचर की जमीन की खरीद-बिक्री नहीं कीया जा सकता है. जमीन पर मालिकाना हक रैयतधारी यानी ज़मीन मालिक  का होता है. लेकिन इस जमीन का म्यूटेशन यानी रगिस्ट्री नहीं किया जा सकता है. 

सिकमी: नकद रु. लेकर किराए पर भूमि

 सिकमी जमीन का मतलब होता है, जमीन एक साल के लिए किराए पर देना। एक किसान दूसरे किसान को जमीन किराए पर देता है और उसके बदले पहले नकद रुपए लेता है। यह राशि लाखों रुपए में होती है। अभी एक एकड़ जमीन 11 हजार रुपए प्रति साल के रेट पर सिकमी पर जाती है। इस हिसाब से जिसकी जितनी जमीन होती है उसको उतना रुपए मिलता है। जिले में कारोबार 3 करोड़ रुपए से ज्यादा कारोबार होता है।

 बटाई: फसल आधी-आधी रखते किसान

 सिकमी के अलावा बटाई जमीन भी होती है। इसमें किसान जिसको जमीन देता है, उससे रुपए नहीं लेता। जब फसल आती है तब दोनों उस फसल से आधा-आधा हिस्सा ले लेते हैं। इसमें जमीन देने वाले को कोई काम नहीं करना पड़ता। पूरा काम जमीन लेने वाला किसान करता है। बटाई पर जमीन लेने वाले किसानों पर जीएसटी का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। बटाई पर अधिकतर छोटे किसान ही खेती करते हैं।

कंक्लूज़न (Conclusion)

फ्रेंड्स i hope कि अब आपको sikmi khata सिकमी ज़मीन के बारे में जानकारी मिल गई होगी। फिर भी अगर कोई भी समस्या हो या फिर कुछ डाउट या कोई सवाल हो अप नीच गिए गये टिप्पणी/comment के ज़रिए पूछ सकते है। धन्यवाद:

10 टिप्पणियाँ

  1. मेरा16डी.जम में घर को बैकवर्ड कब्जा कर ब्लौक से गैरमजरूआ बनबस्ती करा लिया है।मेरा बन्दोवस्ती,रीटर्न एवं सरकारी रसीद कटता है।नया सर्वे में उसका खाता खारीज कराकर मैं अपना खाता खुलवा दिया है।सर्वै का दफा 87खुला हुआ है,करता होगा?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्रिप्या, अपना जानकारी डिटेल्ज़ में दे

      हटाएं
  2. Jamin ka sikmidhakhalkar hu rasid kata gya he jamindar jamin vapas le sakta he.rasid online kate he.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सिक्मी वाले ज़मीन का रसीद कट गया है तो ओ मालिक को नहि हो सकता लेकिन उसका रसीद नहि कटा है तो सिविल कोर्ट में मालिक द्वारा टाइटल सूट की अप्पिल करने पर कुछ सर्तो के साथ सिक्मी खाता टूट भी सकता है।

      हटाएं
  3. Khatiyan 1908 and 1932 dono khatiya me adiwasi ka me hai lekin adhbatai likha hai belagan hai kiska jameen hai

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अभी दख़ल क़ब्ज़ा किसका है? अधबटाई मतलब जो सिकमी धारी है मूल रैयत को अधबटाई देगा लेकिन मूल रैयत सिकमीधारी को हटा नहि सकता।

      हटाएं
  4. 1949 से 1963 तक सिकमी श्रेणी 9 में दर्ज है तो क्या वह za&lr 1950 act 20 के अनुसार अधिवासी माना जायेगा जिसे 15 गुना लगान जमा करके सीरदार बनना था या फिर वह किसी दूसरी श्रेणी में रखा था

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्रिप्या, अपना जानकारी डिटेल्ज़ में दे। या फिर किसी सिवल कोर्ट के वकील से मिले।

      हटाएं
  5. खतियान में 29 एकड़ जमीन दो भाई के नाम से है, जिसमे 9 प्लॉट हैं ,क्या सभी प्लॉट में बराबर हिस्सा होगा?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सिम्पल शब्दों में ये समझिए, की 2 भाई है तो आधा - आधा दोनो का हक़ है सभी प्लॉट में लेकिन किसी स्पेशल केस में जैसे की मान लीजिए किसी 1 प्लॉट में 1 भाई के मकान है और ओ प्लॉट की रक़बा उसके हिस्से से ज़्यादा नहि हो तो जैसे यह 14.5 एकड़ से ज़्यादा नहि होगा तो दूसरा भाई उसमें जबरन नहि कर सकता है, उसके बदले कही और ले सकता है।

      हटाएं
एक टिप्पणी भेजें
और नया पुराने